
Bihar Board Matric Inter ka Marksheet Kab Aayega 2026:- हर साल जब बिहार बोर्ड का रिजल्ट आता है तो छात्रों के चेहरे पर खुशी और एक राहत की सांस होती है। चाहे वह मैट्रिक का स्टूडेंट हो या इंटर का ‘पास’ होने की खुशी अलग ही होती है। लेकिन असली कहानी रिजल्ट आने के बाद शुरू होती है। रिजल्ट आने के कुछ ही दिनों बाद हर छात्र के मन में बस एक ही सवाल घूमने लगता है भाई, हमारा ओरिजिनल मार्कशीट कब मिलेगा?
यही वह समय होता है जब छात्र इंटरनेट पर यूट्यूब पर और अपने सीनियर से बार-बार यही सवाल पूछते हैं। कई बार तो बच्चे हर दूसरे दिन साइकिल उठाकर अपने स्कूल या कॉलेज पहुंच जाते हैं और वहां के क्लर्क या प्रिंसिपल से पूछते हैं सर मार्कशीट आया क्या? और आगे से जवाब मिलता है नहीं बाबू, अभी नहीं आया,अगले हफ्ते आना।
अगर आप भी इस साल यानी 2026 में मैट्रिक या इंटर पास कर चुके हैं और अपनी ओरिजिनल मार्कशीट का इंतजार कर रहे हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए बहुत जरूरी है। एक ब्लॉगर के तौर पर और सालों से बिहार बोर्ड के इस पूरे सिस्टम को करीब से देखने के अनुभव के आधार पर आज मैं आपको इस पूरे प्रोसेस की एक-एक जमीनी हकीकत बताने वाला हूँ। हम जानेंगे कि मार्कशीट आने में इतनी देर क्यों होती है यह कब तक आपके हाथों में होगी आपको इसके साथ कौन-कौन से जरूरी कागजात (Documents) लेने हैं और क्या इसके लिए कोई पैसा भी देना पड़ता है?
मार्कशीट आने में आखिर देर क्यों होती है? जानिए इसके पीछे का पूरा सिस्टम
बहुत से छात्रों को लगता है कि जैसे ही इंटरनेट पर रिजल्ट आया वैसे ही बिहार बोर्ड प्रिंटर चालू करता है और तुरंत मार्कशीट छापने लगता है। लेकिन असल जिंदगी में ऐसा नहीं होता। इसके पीछे एक लंबा और बेहद व्यवस्थित प्रशासनिक प्रोसेस (Systematic Process) होता है। चलिए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
जब बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) मैट्रिक और इंटर का रिजल्ट घोषित करती है तो वह केवल एक डिजिटल डेटा होता है। ओरिजिनल मार्कशीट को बिहार के अंदर किसी आम प्रिंटिंग प्रेस में नहीं छपवाया जाता। इसके लिए सुरक्षा कारणों से बकायदा टेंडर निकाला जाता है एक बाहरी एजेंसी चुनी जाती है और उसे कॉन्ट्रैक्ट दिया जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया को हम इन स्टेप्स में समझ सकते हैं:
- डेटा ट्रांसफर: रिजल्ट पब्लिश होने के बाद बिहार बोर्ड लाखों छात्रों का पूरा डेटा (नाम, रोल नंबर, मार्क्स, रजिस्ट्रेशन डिटेल्स) उस चुनी हुई एजेंसी को सौंपता है।
- प्रिंटिंग और चेकिंग: एजेंसी बेहद हाई-क्वालिटी और सिक्योरिटी फीचर्स वाले पेपर पर हर एक छात्र की मार्कशीट प्रिंट करती है। इसमें थोड़ा समय लगता है क्योंकि लाखों की संख्या में कॉपियां छपती हैं।
- बिहार बोर्ड को वापसी: छपाई पूरी होने के बाद वह सारी मार्कशीट वापस पटना में बिहार बोर्ड के मुख्यालय पहुंचती है।
- जिलों में रवानगी (DEO Office): बिहार बोर्ड इन मार्कशीट्स को अलग-अलग बंडलों में पैक करके बिहार के सभी 38 जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO – District Education Officer) के कार्यालय में भेजता है।
- स्कूलों द्वारा कलेक्ट करना: जब डीईओ ऑफिस में मार्कशीट पहुंच जाती है तब आपके स्कूल या कॉलेज के प्रधान (प्रिंसिपल या उनके द्वारा अधिकृत कोई कर्मचारी) वहां जाकर अपने स्कूल के बच्चों का बंडल लेकर आते हैं।
- वेरिफिकेशन और वितरण: स्कूल में आने के बाद प्रिंसिपल साहब उस पर अपना साइन और स्कूल की मोहर लगाते हैं। इसके बाद ही वह मार्कशीट आपको बांटने के लिए तैयार होती है।
एक जरूरी सलाह: कई बार छात्र बहुत ज्यादा हड़बड़ी में होते हैं। किसी को आगे एडमिशन लेना होता है तो किसी को किसी स्कॉलरशिप या नौकरी के फॉर्म में लगाना होता है। ऐसे में कुछ छात्र सोचते हैं कि वे सीधे पटना बिहार बोर्ड के ऑफिस चले जाएं या अपने जिले के डीईओ ऑफिस चले जाएं और वहां से अपनी मार्कशीट ले लें।
यह गलती भूलकर भी मत करना! आपको वहां से आपकी मार्कशीट कभी नहीं मिलेगी। बोर्ड या डीईओ ऑफिस व्यक्तिगत रूप से किसी भी छात्र को मार्कशीट नहीं सौंपता। आपको आपकी ओरिजिनल मार्कशीट सिर्फ और सिर्फ आपके अपने स्कूल या कॉलेज से ही मिलेगी। इसलिए वहां जाकर अपना समय और पैसा बर्बाद न करें।
पिछले सालों का रिकॉर्ड और 2026 में कब आएगी मार्कशीट?
बिहार बोर्ड का एक नियम रहा है कि वह कभी भी कोई काम गुपचुप तरीके से नहीं करता। जब भी मार्कशीट जिलों में भेजी जाती है तो बोर्ड बाकायदा एक ऑफिशियल नोटिफिकेशन (आधिकारिक विज्ञप्ति) जारी करता है। यह नोटिफिकेशन बिहार के प्रमुख समाचार पत्रों (जैसे दैनिक भास्कर, हिंदुस्तान, दैनिक जागरण) में विज्ञापन के रूप में छपता है साथ ही बिहार बोर्ड के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स (Twitter/X और Facebook) पर भी अपलोड किया जाता है।
अगर हम पिछले कुछ सालों के पैटर्न और रिकॉर्ड्स को देखें तो कहानी कुछ इस तरह रही है:
| परीक्षा का प्रकार | पिछले साल (मार्कशीट जारी होने की तारीख) | 2026 में संभावित समय |
| इंटर (Class 12th) | 20 मई के आसपास | मई का तीसरा या चौथा हफ्ता (चल रहा है) |
| मैट्रिक (Class 10th) | 27 मई के आसपास | मई के आखिरी हफ्ते से जून के पहले हफ्ते तक |
पिछले कई सालों से यह देखा जा रहा है कि मई महीने के दूसरे-तीसरे हफ्ते से लेकर आखरी हफ्ते के बीच में बोर्ड मार्कशीट भेजने की प्रक्रिया शुरू कर देता है। साल 2026 की बात करें तो अब मई का महीना अपने अंतिम पड़ाव पर है। सूत्रों और आंतरिक जानकारी के अनुसार बिहार बोर्ड ने मार्कशीट प्रिंटिंग का काम लगभग पूरा कर लिया है और इन्हें जिलों में भेजने की तैयारी चल रही है।
हो सकता है कि जब आप यह आर्टिकल पढ़ रहे हों तब तक बोर्ड का ऑफिशियल नोटिफिकेशन आ चुका हो या आने ही वाला हो। जैसे ही नोटिफिकेशन आएगा 100% साफ हो जाएगा कि किस तारीख से आपके जिले के डीईओ ऑफिस में मार्कशीट मिलने लगेगी।
मार्कशीट के साथ मिलने वाले अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट्स (भूलना मत!)
जब आप स्कूल जाते हैं तो अक्सर आप सिर्फ ‘मार्कशीट’ मांगते हैं और स्कूल वाले भी आपको सिर्फ वही थमा देते हैं। लेकिन रुकिए! बोर्ड सिर्फ मार्कशीट नहीं भेजता। उसके साथ कुछ और बेहद महत्वपूर्ण कागजात आते हैं जिन्हें लिए बिना आपको स्कूल से बाहर नहीं निकलना चाहिए। अगर आप उन्हें छोड़ देंगे तो बाद में जब आप आगे की पढ़ाई (जैसे ग्रेजुएशन, बीटेक, पॉलिटेक्निक या किसी अन्य कोर्स) के लिए जाएंगे तो वहां एडमिशन रुक जाएगा।
आइए देखते हैं कि आपको क्लास के हिसाब से कौन-कौन से डॉक्यूमेंट्स मिलने वाले हैं:
1. मैट्रिक (Class 10th) वाले छात्रों के लिए चेकलिस्ट:
- ओरिजिनल मार्कशीट (Original Marksheet): इसमें आपके सभी विषयों के अंक लिखे होते हैं।
- औपबंधिक प्रमाण पत्र (Provisional Certificate): यह इस बात का सबूत होता है कि आपने परीक्षा पास कर ली है, जब तक कि दो-तीन साल बाद आपका ओरिजिनल सर्टिफिकेट (मूल प्रमाण पत्र) नहीं आ जाता।
2. इंटर (Class 12th) वाले छात्रों के लिए चेकलिस्ट:
- ओरिजिनल मार्कशीट (Original Marksheet)
- औपबंधिक प्रमाण पत्र (Provisional Certificate)
- प्रवजन प्रमाण पत्र (Migration Certificate): यह डॉक्यूमेंट सबसे ज्यादा जरूरी है। अगर आप बिहार बोर्ड छोड़कर किसी दूसरी यूनिवर्सिटी (जैसे दिल्ली यूनिवर्सिटी, बीएचयू) या किसी अन्य राज्य के कॉलेज में एडमिशन लेंगे, तो बिना माइग्रेशन सर्टिफिकेट के आपका एडमिशन नहीं होगा।
स्कूल के स्तर पर मिलने वाले अन्य डॉक्यूमेंट्स:
ऊपर बताए गए डॉक्यूमेंट्स तो बोर्ड की तरफ से छपकर आते हैं। लेकिन इनके अलावा आपको कुछ और पेपर्स की जरूरत पड़ती है जो स्कूल खुद अपने स्तर पर तैयार करके देता है:
- स्कूल/कॉलेज लीविंग सर्टिफिकेट (SLC / CLC / TC): इसे ट्रांसफर सर्टिफिकेट भी कहते हैं। जब आप एक स्कूल छोड़कर दूसरे कॉलेज में जाते हैं, तो इसकी जरूरत होती है। यह स्कूल वाले अपने फॉर्मेट पर हाथ से या कंप्यूटर से प्रिंट करके, साइन-मोहर के साथ देते हैं।
- आचरण प्रमाण पत्र (Character Certificate): कई अच्छे कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में एडमिशन के समय छात्र का कैरेक्टर सर्टिफिकेट मांगा जाता है। इसके लिए आप स्कूल में अलग से आवेदन करके इसे बनवा सकते हैं।
स्कूल जाकर छात्रों को क्या करना होगा? (एक व्यावहारिक अनुभव)
यहाँ मैं अपना एक व्यक्तिगत अनुभव साझा करना चाहता हूँ जो मैंने जमीन पर देखा है। कई बार ऐसा होता है कि बिहार बोर्ड नोटिफिकेशन जारी कर देता है, मार्कशीट जिला मुख्यालय (DEO Office) पहुंच भी जाती है, लेकिन आपके स्कूल के प्रिंसिपल या क्लर्क आराम से बैठे रहते हैं। वे हफ़्तों तक डीईओ ऑफिस जाकर आपके स्कूल का बंडल लेकर ही नहीं आते।
कभी-कभी जब बच्चे स्कूल जाकर पूछते हैं, तो क्लर्क कह देता है, अरे भाई! अभी बोर्ड से आया ही नहीं है। जबकि हकीकत यह होती है कि बोर्ड ने भेज दिया है, बस आपके स्कूल वाले उसे लाने की जहमत नहीं उठा रहे हैं।
आपको क्या करना है?
जैसे ही मैं अपने ब्लॉग या सोशल मीडिया के माध्यम से आपको सूचित करूँ कि ऑफिशियल नोटिफिकेशन आ गया है और मार्कशीट जिलों में पहुंच चुकी है, आपको तुरंत अपने कुछ दोस्तों का एक ग्रुप बनाना है और स्कूल जाना है। वहां जाकर प्रिंसिपल साहब पर थोड़ा नैतिक दबाव (Pressure) बनाना है। उनसे शालीनता से कहना है कि, सर, बोर्ड का आदेश आ गया है और बाकी स्कूलों में मार्कशीट मिलने लगी है। कृपया हमारे स्कूल की भी मार्कशीट मंगवाई जाए ताकि हम आगे एडमिशन ले सकें। जब 10-15 बच्चे एक साथ जाकर यह बात कहेंगे, तो स्कूल प्रशासन तुरंत एक्टिव होगा और क्लर्क को भेजकर मार्कशीट मंगवा लेगा।
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मार्कशीट लेने के लिए साथ में क्या लेकर जाना होगा?
स्कूल प्रशासन किसी भी राह चलते इंसान को आपकी मार्कशीट नहीं सौंप सकता। इसके लिए उन्हें एक पुख्ता सबूत चाहिए होता है कि आप ही वह असली छात्र हैं जिसने परीक्षा पास की है। इसलिए जब भी आप घर से स्कूल के लिए निकलें, तो नीचे दी गई चीजें अपने साथ ले जाना न भूलें:
- बिहार बोर्ड का ओरिजिनल एडमिट कार्ड (Admit Card): यह सबसे बड़ा और अचूक सबूत है। इस पर आपका रोल कोड और रोल नंबर होता है, जिसे देखकर क्लर्क अपनी पंजी (Register) में आपका मिलान करता है।
- रजिस्ट्रेशन कार्ड (Registration Card): एडमिट कार्ड के साथ अपना ओरिजिनल रजिस्ट्रेशन कार्ड भी रख लें, कभी-कभी इसकी भी मांग कर दी जाती है।
- आधार कार्ड (Aadhar Card): पहचान पत्र के तौर पर अपना आधार कार्ड साथ रखें।
- पासपोर्ट साइज फोटो: सुरक्षित रहने के लिए दो रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो जेब में डाल लें, कई बार एसएलसी या कैरेक्टर सर्टिफिकेट के फॉर्म पर चिपकाने के लिए इसकी जरूरत पड़ जाती है।
एक और जरूरी टिप: कोशिश करें कि आप खुद (स्वयं) स्कूल जाएं। अगर आप किसी बहुत जरूरी कारण से नहीं जा पा रहे हैं और अपने माता-पिता या भाई को भेज रहे हैं, तो उन्हें अपना एडमिट कार्ड, आधार कार्ड और एक लिखित अथॉरिटी लेटर (सहमति पत्र) देकर भेजें, जिसमें लिखा हो कि आप किसी कारणवश नहीं आ पा रहे हैं और आपके बदले इन्हें डॉक्यूमेंट दे दिया जाए। हालांकि, कुछ स्कूल सख्त होते हैं और छात्र के बिना मार्कशीट नहीं देते, इसलिए खुद जाना ही सबसे बेस्ट रहेगा।
सबसे बड़ा मुद्दा: मार्कशीट के लिए कितने पैसे लगेंगे?
अब आते हैं उस कड़वे सच पर, जिसका सामना बिहार के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के लगभग हर छात्र को करना पड़ता है। जैसे ही आप काउंटर पर मार्कशीट या सीएलसी मांगने जाएंगे, वहां बैठा क्लर्क आपसे कहेगा, चलो, ₹200 निकालो या ₹500 लगेगा, तब सब कागजात मिलेगा।
इस बात को अपने दिमाग में अच्छी तरह से बिठा लीजिए: बिहार बोर्ड के नियमों के अनुसार, ओरिजिनल मार्कशीट, प्रोविजनल सर्टिफिकेट या माइग्रेशन सर्टिफिकेट देने के एवज में छात्रों से ₹1 भी लेना पूरी तरह से गैर-कानूनी (Illegal) है। यह बिल्कुल अवैध वसूली है।
इसके पीछे का गणित समझिए:
जब आपने परीक्षा देने के लिए परीक्षा फॉर्म (Exam Form) भरा था, उसी समय बिहार बोर्ड आपसे परीक्षा शुल्क के साथ-साथ मार्कशीट शुल्क, प्रोविजनल सर्टिफिकेट शुल्क और माइग्रेशन शुल्क जोड़कर ले चुका होता है। बोर्ड को उनका पूरा पैसा एडवांस में मिल जाता है। इसलिए स्कूल के स्तर पर आपसे दोबारा पैसे मांगना पूरी तरह गलत है।
फिर स्कूल वाले पैसे क्यों मांगते हैं?
स्कूल वाले अक्सर तर्क देते हैं कि, हमारा स्टाफ डीईओ ऑफिस गया था, वहां गाड़ी का भाड़ा लगा, वहां चाय-पानी का खर्च लगा, इसलिए हम बच्चों से ₹100-₹200 ले रहे हैं। कुछ जगहों पर स्कूल के विकास फंड या बकाया रसीद के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं।
आपको क्या करना चाहिए?
- चुपचाप पैसे न दें: अगर कोई आपसे सीधे तौर पर ‘मार्कशीट देने के नाम पर’ पैसे मांग रहा है, तो सीधे मना करें और कहें कि बोर्ड की तरफ से यह मुफ्त है।
- रसीद की मांग करें: अगर वे अड़े रहते हैं कि पैसा देना ही पड़ेगा, तो उनसे कहिए, ठीक है सर, मैं ₹200 देने को तैयार हूँ, लेकिन आप मुझे इस ₹200 की आधिकारिक रसीद (Official Receipt) काट कर दीजिए, जिस पर स्कूल की मोहर हो और लिखा हो कि यह पैसा मार्कशीट के लिए लिया जा रहा है। यकीन मानिए, रसीद मांगने की बात सुनते ही क्लर्क के पसीने छूट जाएंगे, क्योंकि वे इसकी कोई रसीद नहीं दे सकते (चूंकि यह पैसा सीधे उनकी जेब में जाता है)।
- प्रिंसिपल से शिकायत करें: अगर क्लर्क बदतमीजी करता है या डॉक्यूमेंट रोकने की धमकी देता है, तो सीधे स्कूल के हेडमास्टर या प्रिंसिपल के केबिन में जाइए और उनसे इसकी शिकायत कीजिए।
हालांकि, कुछ कॉलेजों में अगर आपका कोई पुराना बकाया शुल्क (जैसे 11वीं या 12वीं की ट्यूशन फीस) बाकी है, तो वे उसे चुकाने के लिए कह सकते हैं, जो कि जायज है। लेकिन सिर्फ मार्कशीट के नाम पर अवैध वसूली के खिलाफ आपको सचेत रहना होगा।
छात्रों द्वारा की जाने वाली 3 आम गलतियाँ (इनसे बचें)
सालों के अनुभव में मैंने देखा है कि छात्र जोश-जोश में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिसका खामियाजा उन्हें आगे चलकर भुगतना पड़ता है। आप इन गलतियों को मत दोहराइएगा:
गलती #1: डॉक्यूमेंट्स मिलते ही बिना चेक किए घर आ जाना
जैसे ही क्लर्क आपको कागजात सौंपे, वहीं खिड़की के पास खड़े होकर 5 मिनट का समय निकालें और एक-एक अक्षर को ध्यान से पढ़ें।
- अपना नाम, माता-पिता का नाम और जन्मतिथि (Date of Birth) की स्पेलिंग चेक करें।
- क्या आपके इंटरनेट वाले रिजल्ट और इस ओरिजिनल मार्कशीट के नंबर आपस में मिल रहे हैं?
- क्या मार्कशीट पर क्यूआर कोड (QR Code) और सीरियल नंबर साफ दिख रहा है?अगर कोई भी छपाई की गड़बड़ी या स्पेलिंग मिस्टेक दिखे, तो तुरंत वहीं पर स्कूल प्रशासन को बताएं ताकि उसे सुधार के लिए भेजा जा सके।
गलती #2: प्रिंसिपल के हस्ताक्षर और मोहर न देखना
मार्कशीट के नीचे एक कोना होता है जहाँ आपके स्कूल के प्रिंसिपल के हस्ताक्षर और स्कूल की गोल मोहर (Round Stamp) लगनी जरूरी होती है। कई बार क्लर्क बिना मोहर लगाए ही जल्दबाजी में बंडल से निकालकर आपको थमा देता है। बिना मोहर और साइन के वह डॉक्यूमेंट किसी भी आगे के एडमिशन या सरकारी काम के लिए ‘अमान्य’ (Invalid) माना जाएगा। इसलिए यह जरूर देख लें।
गलती #3: डॉक्यूमेंट्स को लैमिनेट (Laminate) करवा लेना
यह आज के समय की सबसे बड़ी गलती है। बहुत से छात्र अपने ओरिजिनल पेपर्स को सुरक्षित रखने के लिए तुरंत दुकान पर जाकर उस पर प्लास्टिक की मोटी परत चढ़वा देते हैं (लैमिनेशन करा लेते हैं)।
आजकल के डिजिटल युग में जब आप किसी बड़े कॉलेज में एडमिशन के लिए जाएंगे या सरकारी नौकरी के वेरिफिकेशन में जाएंगे, तो वहां अधिकारी डॉक्यूमेंट के पीछे की तरफ अपनी मोहर लगाते हैं या साइन करते हैं। कई बार डॉक्यूमेंट को स्कैन करना पड़ता है। लैमिनेशन होने के कारण क्यूआर कोड ठीक से स्कैन नहीं हो पाता और पीछे मोहर भी नहीं लग पाती। कुछ मामलों में तो लैमिनेशन हटाने के चक्कर में ओरिजिनल पेपर ही फट जाता है। इसलिए डॉक्यूमेंट्स को किसी अच्छी फाइल या फोल्डर में रखें, प्लास्टिक लैमिनेशन कराने से बचें।
अंतिम शब्द
मैट्रिक और इंटर की ओरिजिनल मार्कशीट सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह आपकी सालों की मेहनत का आधिकारिक प्रमाण है। साल 2026 की यह मार्कशीट अब बहुत जल्द आपके हाथों में होने वाली है। प्रिंटिंग का काम खत्म हो चुका है और कभी भी आपके मोबाइल स्क्रीन पर बिहार बोर्ड का ऑफिशियल नोटिफिकेशन फ्लैश हो सकता है।
जैसे ही आधिकारिक घोषणा होगी, मैं अपने इस ब्लॉग के माध्यम से आपको तुरंत सूचित कर दूंगा। आपको बस इतना करना है कि बताए गए सभी जरूरी पेपर्स (जैसे एडमिट कार्ड और आधार कार्ड) को अभी से एक जगह संभालकर रख लें, ताकि उस दिन हड़बड़ी न हो। स्कूल जाएं, अपना अधिकार समझें, किसी भी तरह की अवैध वसूली को बढ़ावा न दें और अपने सभी डॉक्यूमेंट्स (मार्कशीट, प्रोविजनल, माइग्रेशन, सीएलसी) को अच्छे से चेक करके ही घर लाएं।
आपके उज्ज्वल भविष्य और आगे की पढ़ाई के लिए मेरी तरफ से ढेरों शुभकामनाएं! अगर आपके मन में इस पूरे प्रोसेस को लेकर कोई भी छोटा या बड़ा सवाल है, तो नीचे कमेंट बॉक्स में बेझिझक पूछें। मैं खुद आपके सवालों का जवाब दूंगा।